कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हुआ हरियाणा का लाल

 (हरियाणा )  झज्जर के खेड़ी जट गांव के रमेश गुलिया ने देश के लिए अपना सर्वोच्य बलिदान दिया है। शहीद के गांव, प्रदेश और देश को अपने लाल पर गर्व है। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों से लोहा लेते हुए रमेश कुमार गुलिया शहीद हो गए थे। रमेश कुमार गुलिया सीआरपीएफ की 116 बटालियन की ब्रावो कंपनी में एएसआई थे और जल्द की सब इंस्पेक्टर बनने वाले थे।

रमेश की शहादत कि सूचना मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गयी। अपने लाल को खोने के दर्द गांव वालों के चेहरे पर नजर आया, लेकिन आंखों में गर्व भी है कि उनके बेटे ने देश की रक्षा करते हुए अपनी जान दी है। रमेश कुमार गुलिया 14 जनवरी 1990 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। कुश्ती को कबड्डी के शौकीन शहीद एएसआई रमेश कुमार गुलिया उत्तरप्रदेश के रामपुर में हुई ओपन भर्ती से सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे।

29 साल की नोकरी में देश की रक्षा करते हुए रमेश कुमार सिपाही से एसएसआई तक पहुंचे और जल्द कि प्रमोट होकर सब इंस्पेक्टर बनने वाले थे। शहीद रमेश के दो छोटे भाई है। जिनमें राजेश सीआरपीएफ और संजय हरियाणा पुलिस में सेवा दे रहे हैं। शहीद रमेश के भाई राजेश ने बताया कि फरवरी में भांजे की शादी में  रमेश छूटी पर आए थे और उस वक्त कहा था कि सब इंस्पेक्टर का कोर्स कर फिर छुट्टी पर आऊंगा। कुछ दिन बाद ही शहीद रमेश को छुट्टी पर घर आना था और आकर घर की मररम्मत करवानी थी। लेकिन उससे पहले ही वो देश के लिए शहीद हो गए।

शहीद रमेश के परिवार में उनके बूढ़े माता -पिता के साथ दो बेटे और पत्नी है। शहीद रमेश कुमार गुलिया कुश्ती और कबड्डी के अच्छे खिलाड़ी थे। उन्हीं के नक्से कदम पर चलते हुए उनका बड़ा बेटा कबड्डी खेल रहा है। छोटा बेटा हरियाणा पुलिस में भर्ती की तैयारी कर रहा है। ग्रमीणों ने सरकार से दोनों बेटों को नोकरी और शहीद परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

ग्रमीणों का कहना है कि जब भी छुट्टी पर आते थे तो गांव में सबसे मिलने के साथ अखाड़े में जाकर युवाओं को फिटनेश के तरीके बताते और खुद भी कुश्ती और कबड्डी करते थे।

शहीद रमेश का पार्थिव शरीर आज शाम तक गांव पहुंचने की उम्मीद है। सीआरपीएफ कमांडेंट की तरफ से परिवार को बताया गया है कि एयर इंडिया के विमान से दोपहर करीब 2 बजे शहीद के पार्थिव शरीर को दिल्ली लाया जाएगा, उसके बाद गांव में लाया जाएगा।

गांव के सरपंच अभिमन्यु ने बताया कि ढासा बॉर्डर से मोटरसाइकिल के काफिले के साथ शहीद रमेश कुमार गुलिया को गांव लाया जाएगा और गांव के श्मशान घाट में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। उन्होंने कहा कि शहीद के अन्तिम संस्कार में अगर कोई मंत्री आया तो उनसे गांव के स्कूल का नाम शहीद रमेश के नाम पर करने की मांग करेंगे ताकि बच्चे उनसे प्रेरणा ले सके।

खेड़ी जट्ट गांव के बेटे ने आजादी के लिए और आजादी के बाद देश की रक्षा में लड़े हर युद्ध में सर्वोच्य  बलिदान दिया है। सरकारी नोकरी कर रहे गांव के बेटों में से आज भी 40 प्रतिशत जवान देश की रक्षा के लिए आर्मी और पैरामिलेट्री फोर्सेस में सेवाए दे रहे है।देश के लिए कुर्बान हुए शहीद रमेश कुमार गुलिया पर हम सबको नाज है।

Post Author: Santosh Yadav

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